विद्यालय के वार्षिकोत्सव पर निबंध (सरल भाषा में) Essay On School Anniversary

आप इस पोस्ट में विद्यालय के वार्षिकोत्सव में निबंध पढेंगे। यह निबंध हमारे विद्यालय के वार्षिक उत्सव पर लिखा गया है। Vidyalay ka varshikoutsav हरेक विद्यालय में मनाया जाता है और विद्यालय के वार्षिक उत्सव के बाद परीक्षा में निबंध लिखने को कहा जाता है इसलिए हम आपके लिए आसान भाषा में निबंध लाये है।

विद्यालय का वार्षिकोत्सव

विद्यालय का वार्षिकोत्सव-

वार्षिकोत्सव का अर्थ है- सलाना जलसा। विद्यालय का यह सबसे बड़ा उत्सव होता है। हमारे विद्यालय का वार्षिकोत्सव प्रति वर्ष जनवरी माह के अंत में मनाया जाता है।

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वार्षिकोत्सव की तैयारी- 

जनवरी में 15 दिन पहले ही हमने बड़े उत्साह के साथ तैयारी आरंभ कर दी। हमारे ड्राइंग अध्यापक जी ने सर्वसम्मति के साथ प्रोग्राम के लिस्ट बनाएं। हमारे एक अध्यापक है, जिन्हेें संगीत बहुत अच्छे से आता है, नाटक का अभिनय कराना भी उन्हें खूब आता है, उन्होंने विद्यार्थियों को अलग-अलग कविताएं कंठस्थ करने के लिए कहा।

एक विद्यार्थी को देशभक्ति का मधुर गीत कठंस्थ करने की आज्ञा दी। 6 विद्यार्थियों को लेकर एक नए नाटक की तैयारी के लिए शुरू करवा दिया, इसके अलावा वे सभी कमरों की साफ-सफाई और कमरों की सजावट करना भी शुरू कर दिए।

मुख्य अतिथि की स्वीकृति- 

हमारे गांव के मुखिया महोदय ने हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य की प्रार्थना पर उत्सव का अध्यक्ष बनना स्वीकार किया।

वार्षिकोत्सव का दिन- 

जनवरी के इस दिन में प्रातः काल से ही विद्यार्थी सफेद कमीज और खाकी पहने दल के दल स्कूल की ओर चल पड़ते, स्कूल की ओर जाता सड़क पर विद्यार्थी ही दिखाई देते थे, स्कूल में खूब साफ सफाई की जाती है। स्कूलों से गुजरने मार्गो को सजाया जाता है। स्कूल के मुख्य द्वार पर बैंड बजने लगा। पीटी छात्र की कतारें बनवाने लगे।

आचार्य महोदय ने अध्यापकों को भी अपना अपना काम दे दिया। ठीक 8:00 बजे अध्यक्ष महोदय जी कार से पहुंचे तथा आचार्य जी ने आगे बढ़ कर उनका स्वागत किया, उन्हें फूल माला पहनाया। इसी समय स्कूल का बैंड बज उठा।

कार्यक्रम तथा समापन- 

सबसे पहले पीटी व्यायाम का प्रदर्शन हुआ सभी को एक साथ व्यायाम करते देख अध्यक्ष जी बहुत प्रसन्न हुए। आचार्य ने अध्यक्ष महोदय का परिचय कराया फिर उन्हें फुल माला पहनाई। सभी विद्यार्थियों ने मिलकर ईश्वर भक्ति की कविता बोली। 

इसके बाद नाटक का प्रारंभ हुआ नाटक के बाद एक गीत हुआ इसके बाद प्राचार्य ने महोदय ने स्कूल में परीक्षा परिणामों का वर्णन किया। अपने स्कूल की विशेषताएं बताई इसके बाद अध्यक्ष महोदय ने विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए और खेलों में उत्तम छात्रों को पुरस्कार दिया गया।

समापन- 

अध्यक्ष महोदय ने स्कूल के प्रबंध की सराहना की। उन्होंने विद्या का महत्व बतलाया, उसके बाद उपप्रधानाचार्य जी ने अध्यक्ष का धन्यवाद किया और समारोह को संपन्न किया गया।

आशा है कि यह निबंध आपको पसंद आया होगा और यह निबंध अच्छा भी लगा होगा।

Chandradeep Kumar

My Name is Chandradeep Kumar. I am the founder of www.fastduniya.com from India.

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